श्री कल्याण मंदिर विधान

श्री कल्याण मंदिर विधान

आचार्य कुमुदचंद महाराज द्वारा रचित पार्श्वनाथ भगवान की सुन्दर स्तुति का हिंदी पद्यानुवाद कर आचार्य श्री सौरभसागर जी ने अतिशय तीर्थ क्षेत्र अहिक्षेत्र मे प्रभु पार्श्वनाथ स्वामी के सम्मुख कल्याण मंदिर विधान की रचना की अतिशयकारी विधान भव में फँसे प्राणियों को भवपार कराने के लिये चप्पु के रूप मे प्रदान किया जो आज सर्वत्र पार्श्वनाथ भगवान की कल्याणकारी स्तुति के रूप में गुंजायमान है कल्याणधाम शब्द से प्रारंभ होने से इस स्त्रोत का कल्याण मंदिर स्त्रोत नाम प्राप्त हुआ