परिचय
गणाचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी

गणाचार्य श्री १०८ पुष्पदंत सागर जी महाराज
गणाचार्य श्री १०८ पुष्पदंत सागर जी महाराज दिगम्बर जैन परंपरा के युगद्रष्टा संत हैं, जिनका जीवन त्याग, तप, संयम और लोकमंगल का अनुपम उदाहरण है। आपका जन्म १ जनवरी १९५४ को गोंदिया, महाराष्ट्र में एक धार्मिक जैन परिवार में हुआ। आपका बाल्यकालीन नाम सुशील जैन था। पूज्य पिताश्री श्री कोमलचंद जी जैन तथा माताश्री श्रीमती मथुरादेवी जी जैन से आपको धर्म, संस्कार और सदाचार की अमूल्य प्रेरणा प्राप्त हुई।
आर्थिक परिस्थितियों के कारण परिवार छतरपुर (मध्यप्रदेश) आ गया, जहाँ संघर्षपूर्ण जीवन के बीच भी आपका मन धर्म और आत्मचिंतन में निरंतर रमा रहा। १९७८ में आचार्य श्री १०८ विद्यासागर जी महाराज को आहार अर्पित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, जिसने आपके जीवन में वैराग्य की ज्योति प्रज्वलित कर दी। तत्पश्चात् आपने आचार्य श्री १०८ विमलसागर जी महाराज के सान्निध्य में संयम पथ स्वीकार किया।
आध्यात्मिक साधना के क्रम में आपने २ नवम्बर १९७८ को सिद्धक्षेत्र नेनागिरि में क्षुल्लक दीक्षा, १४ जनवरी १९८० को ऐलक दीक्षा, तथा मात्र १६ दिनों के उपरांत, ३१ जनवरी १९८० को बाला बेहट (उत्तर प्रदेश) में मुनि दीक्षा ग्रहण की। आगे चलकर २१ मार्च १९८६ को गोम्मटगिरि, इंदौर में आपको आचार्य पद से विभूषित किया गया।
अपनी सरल प्रवचन शैली, गहन दार्शनिक दृष्टि, युवा प्रेरणा और संस्कार-जागरण के कार्यों के कारण आपको श्रद्धापूर्वक "छत्तीसगढ़ के विद्यासागर" के रूप में भी स्मरण किया जाता है। आज आपका संपूर्ण जीवन असंख्य श्रद्धालुओं के लिए धर्म, संयम और आत्मोन्नति का प्रेरणास्रोत बना हुआ है।
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जीवन-परिचय (संक्षेप में)
- जन्म: १ जनवरी १९५४
- जन्म नाम: सुशील जैन

- जन्मस्थान: गोंदिया, महाराष्ट्र
- पिता: श्री कोमलचंद जी जैन
- माता: श्रीमती मथुरादेवी जी जैन
- दीक्षा गुरु: आचार्य श्री १०८ विमलसागर जी महाराज
- प्रेरणास्रोत: आचार्य श्री १०८ विद्यासागर जी महाराज
- क्षुल्लक दीक्षा: २ नवम्बर १९७८, सिद्धक्षेत्र नेनागिरि, मध्यप्रदेश
- ऐलक दीक्षा: १४ जनवरी १९८०, सिद्धक्षेत्र नेनागिरि, मध्यप्रदेश
- मुनि दीक्षा: ३१ जनवरी १९८०, बाला बेहट, उत्तर प्रदेश
- आचार्य पद: २१ मार्च १९८६, गोम्मटगिरि, इंदौर
- विशेष पहचान: "छत्तीसगढ़ के विद्यासागर", संस्कार-जागरण, युवा प्रेरणा एवं सरल, प्रभावशाली प्रवचन शैली।