श्री भक्तामर विधान

श्री भक्तामर विधान

श्री भक्तामर महामंडल विधान श्री गुरूदेव ने छुल्लक अवस्था मे भिंड में पद्यानुवाद किया आचार्य मानतुंग स्वामी द्वारा रचित भक्तामर स्त्रोत भक्ति जगत में सर्वोपरि है इस स्त्रोत का भक्त अमर शब्द से ऑरंभ होने के कारण भक्तामर स्त्रोत सार्थक नाम हुआ गुरूदेव ने इस स्त्रोत का हिंदी भाषा में पद्यानुवाद भिंड नगर में छुल्लक अवस्था मे किया फिर इसकी विधान के रूप में सुन्दर रचना की जिसे जैन जगत में श्रद्धात्मकता के साथ नित नियम में उतारा है ||